Ahana: नमस्ते everyone. मेरा नाम अहाना आवरा है, और मैं एक IT कंपनी रन करती हूँ। और आज हम जिनसे मिलने वाले हैं, वो बहुत ही इंटरेस्टिंग पर्सनालिटी हैं। उनसे मिलकर के हर किसी को बहुत अच्छा लगता है। हमारे साथ हैं बिनय भैया, आर्ट ऑफ़ लिविंग परमाकल्चर के हेड हैं। और जो इनका एक्सपीरियंस है नेचर को लेकर के, वो हमें अपनी नेचर के साथ कनेक्ट करता है। तो मैं उनसे बातचीत के दौरान, हम सब के क्वेश्चंस लेने की कोशिश करूंगी और डिटेल में जानूंगी कि आर्ट ऑफ़ लिविंग परमाकल्चर है क्या, और हम सबको वो कैसे कनेक्ट करता है अपने से, और हम उसे अपनी लाइफ में कैसे लेकर के आ सकते हैं। बिनय भैया।
Binay: थैंक यू, अहाना, फॉर हैविंग मी। देखिए, खेती-बाड़ी की तो बातें हैं, लेकिन उसमें जो सबसे बड़ा तड़प है ना, वो है कि अगली जनरेशन नहीं देखती। अगली जनरेशन भेड़-बकरी चराते हुए नहीं दिखेगी, गाय पालते हुए नहीं दिखेगी, गोबर उठाते हुए नहीं दिखेगी, खेती करते हुए नहीं दिखेगी, मशीन चलाते हुए दिखेगी, मोबाइल लेते हुए दिखेगी, रील बनाते हुए दिखेगी। उसमें कोई गलत नहीं है, लेकिन ये सारा काम तो भोजन के आधार पर है ना? भोजन मिल रहा है तो बाकी सब काम होगा। तो पुराने समय में हमारा सारा जो प्रयोजन था दिन भर का या पूरे जीवन का, वो था कि हम कितना ज्यादा से ज्यादा उगा लें ताकि परिवार में पेट पल सके, पल सके लोगों का। कैश हो, नहीं हो, अनाज होना चाहिए। तो मुझे इतना अच्छा लग रहा है कि जो आज की पीढ़ी है, Ahana doesn't come from some great-grandfather generation, ये आज के बच्चे हैं, और इंजीनियरिंग करके अभी नौकरी देने के बदले, नौकरी करने के बदले नौकरी दे रही हैं। कितने लोगों का, यू नो, घर चल रहा है इनकी वजह से। और जो-जो आप लेटेस्ट ट्रेंड में जो आप बोलेंगे स्टार्टअप बोल दो, या यू नो, हैविंग फ्यू करोड़ ऑफ टर्नओवर, वो सारी जो टर्मिनोलॉजीज़ हैं, she lives with that and she has proven कि ये सारा कुछ हम कर सकते हैं। बट उसके परे भी जाके इन चीजों में रुचि दिखाना कि भाई आप इतना तो हम कर लिए, और वो हम कर लेंगे, इससे कोई बड़ी बात नहीं है। बट हाउ इज दैट ग्रोइंग द फूड शुड बी क्वालिटी ओरिएंटेड? जब जवानी में ही तबीयत खराब होने लगती है ना, भरी जवानी में जब कंधों में दम नहीं दिखता, हाथ में दम नहीं होता, कमर दुखने लगता है, तो कहीं ना कहीं जो बिरले होते हैं, जिनको ये ज्ञान होता है, अनुभूति में आता है कि स्वास्थ्य इतना गड़बड़ क्यों है इवन दो आई एम टेकिंग केयर ऑफ़ माइसेल्फ़, आई डोंट हैव, यू नो, एनी हैबिट्स, ये सब कुछ नहीं है, फिर भी गड़बड़ क्यों हो रहा है। तो ये मेरे लिए बड़ा खुशी की बात है कि कोई ऐसा, यू नो, ऐसी बच्चे आए हैं हमारे सामने ये पूछने के लिए, जिन्होंने दुनिया में कुछ अचीव कर लिया, और अब ये चीज़ जानना चाह रहे हैं। तो आई रियली अप्रिशिएट दैट।
Ahana: थैंक यू सो मच भैया। आपने बहुत अच्छा पॉइंट कवर किया है। आज हम बाहर निकल करके अलग-अलग तरह के फ़ूड खाते हैं, इंटरेस्ट भी दिखाते हैं नेचुरल फ़ूड की जगह। और सच कहूं तो मुझे हेल्थ ने ही परमाकल्चर से जोड़ा है। और जब मैंने आपकी बातें सुनी तो जो, इट वाज़ अमेजिंग। और मेरी हेल्थ में रिकवरी भी तभी आई थी जब मैंने अपना फ़ूड चेंज किया था। तो इट इज समथिंग बिग और कनेक्टेड फ़्रॉम द इनर नेचर। हम जैसे ही अपनी बाहर की दुनिया चेंज करते हैं तो अंदर से हमें हमारी बॉडी जवाब देने लगती है। तो वो मुझे समझ आई कि ये कहीं ना कहीं बहुत गहरा साइंस है, और इसमें रुचि भी मुझे ऐसे ही आई है। तो भैया, मेरे कुछ और भी क्वेश्चंस हैं आज की जनरेशन के अकॉर्डिंग।
Binay: हां-हां, बिल्कुल।
Ahana: जी, तो परमाकल्चर हमारे यहां पर नेचुरल फार्मिंग है, है ना? इसमें अलग-अलग चीजें होती हैं, हम जैसे नेचुरल फार्मिंग टर्म सुनते हैं, परमाकल्चर सुनते हैं, ऑर्गेनिक सुनते हैं, तो आप हमें थोड़ा समझाएंगे कि ये क्या है और कैसे डिफरेंशिएट होता है?
Binay: हां, ये अच्छा प्रश्न है। देखो, जब अलग-अलग टर्मिनोलॉजी बनी है, तो माने कुछ ना कुछ अलग-अलग इसके अर्थ रहे होंगे। इनकी जो क्रिया पद्धति है, वो जरूर अलग रही होगी। अभी जो सबसे ज्यादा ट्रेंड में चला है, वो ऑर्गेनिक है। ऑर्गेनिक के नाम से हम मतलब अपना जेब खोल देते हैं, लुट जाते हैं, विश्वास बढ़ गया है। बट ऑर्गेनिक वाले भी जानते हैं कि उसमें उतना दम नहीं है। ऑर्गेनिक को सर्टिफिकेट से जोड़ा, और जो सर्टिफिकेट प्रदान करने वाली बॉडी है ना भारत में, अपेडा बोलते हैं। एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट कुछ-कुछ-कुछ उसका है, वो गूगल बता देगा आपको, एआई असिस्टेंट आपका बताएगा अपेडा का फुल फॉर्म क्या है। वो-वो पैरेंट बॉडी है कह सकते हैं, जो छोटे-छोटे कंपनीज़ को लाइसेंस देती है कि यू गो एंड सर्टिफाई द फार्मर्स। पता है, अपेडा खुद ब्लैकलिस्ट हो गया। ओके? उनके जो सर्टिफाइड प्रोडक्ट्स गए यूरोप में, अमेरिका में, कहां-कहां गए, उसमें 40 गुना ज्यादा केमिकल मिला। और ये पब्लिक फोरम पे उपलब्ध है, मेरा कोई पर्सनल उनसे ये नहीं है। तो ऑर्गेनिक पर उतना भरोसा नहीं रखें तो अच्छा है, क्योंकि ऑर्गेनिक वहीं से चला जहां से-जहां से रसायन युक्त खेती की शुरुआत हुई। उन्होंने ही ये टर्मिनोलॉजी हमें ला के दी। चीजें बदलती हैं। जो तकनीक जगत से जो चीजें आएंगी, जो इंडस्ट्री से चीजें आएंगी, वो बदलती हैं। तो ऑर्गेनिक को वहीं तक रहने देते हैं, दम नहीं है उतना। नेचुरल ऑफकोर्स बढ़िया है, रसायन मुक्त है वो। पहले वैसा ही होता आया था, आगे वही होगा। बीच में हमने कुछ ट्रायल किए कि हमने हम ये करके देखते हैं, हम वो करके देखते हैं। जैसे आप किसी यू नो, किसी को कुछ सिखा रहे हो टेक्निकल चीज, तो बोलेगा, "अब साइकिल दोनों हाथ से, एक हाथ से चलाएं तो क्या होगा?" तो ये सारे थोड़े से एक्सपेरिमेंट लोग करने लगे बीच में और उस एक्सपेरिमेंट के चक्कर में डुबा दिया सब कुछ। इतना डुबा दिया कि अब सबको कहीं ना कहीं जो हमारी बात से सहमत हो नहीं हो, बाजार से आई हुई सब्जी पर आपको गुणवत्ता का भरोसा नहीं है। इस चीज को पचने दीजिए अंदर। तो प्राकृतिक खेती तो और नैसर्गिक कह लो, जैविक कह लो, वो सब ये है। परमाकल्चर क्या है? अब क्या है परमाकल्चर जो है ना, वो एक घर जैसा है। अब आपके घर में शौचालय भी है, बेडरूम भी है, पूजा रूम, बहुत तरह-तरह के रहने के जगह हैं, पार्किंग है, सब कुछ है, वो मिला के घर बनता है। परमाकल्चर का एक जो अंग है, वो एग्रीकल्चर की बात करता है, वो भी परमानेंट वाला एग्रीकल्चर। दूसरे-तीसरे जो अंग हैं, वो आपको ये भी सिखाता है कि भाई धरती को शुद्ध रखने का ठेका खाली किसानों ने नहीं लिया है। आप यहां डोमेस्टिकली रोज दिन हारपिक और फिनाइल और शैम्पू और सरफ धरती में डालते रहो, आपके सीवेज टैंक से के थ्रू कहीं-कहीं धरती में जाता रहे, और हमारे ऊपर आप बम फोड़ो कि नहीं, किसान ये करेगा, नहीं। परमाकल्चर कहता है कि आपका लाइफ इटसेल्फ शुड बी सस्टेनेबल। है ना? क्योंकि बीमारियां खाली भोजन से ही नहीं आ रही। आपके कपड़े सिंथेटिक हैं तो उससे भी बीमारियां आ रही हैं। जो प्लास्टिक के माइक्रो पार्टिकल्स हवा में उड़ रहे हैं, चप्पल-जूते इतने ज्यादा हो गए, हमारा गारमेंट इंडस्ट्री द सेकंड बिगेस्ट पोल्यूटर इन द वर्ल्ड, ये सब कुछ ये कृषि के परे की बात है। तो परमाकल्चर इन सब चीजों पर भी उंगली उठाता है कि भाई वहां भी ठीक करो, वहां भी ठीक करो। ये गाड़ी जैसा है। है ना? गाड़ी में खाली चार चक्के में हवा भरी हो तो नहीं चलेगा। खाली इग्निशन सही हो तो नहीं चलेगा, खाली ब्रेक्स सही हो तो नहीं चलेगा। सारे कॉम्पोनेंट्स जब सही होंगे, तब चलेगा। तो परमाकल्चर इस सृष्टि को उस गाड़ी की तरह ट्रीट करता है जहां एक छोटा सा पिन भी उतना ही इंपॉर्टेंट है जहां इतना बड़ा टायर। सारे कॉम्पोनेंट्स सही होंगे तब जीने में आनंद आएगा। तब एक किसान ठीक से खेती कर पाएगा, एक उद्योग चलाने वाला अपना उद्योग चला पाएगा, कोई नौकरी करने वाला नौकरी करेगा, कोई कलाकार लोगों का मनोरंजन करेगा, सब सही से कर पाएगा जब सबका इसमें सपोर्ट होगा तब। परमाकल्चर बड़ा भाई है। मैं इसको इस तरह से देखता हूं।
Ahana: वाओ! थैंक यू भैया। इट्स रियली अमेजिंग। और मैंने आपका एक आर्टिकल भी पढ़ा था जिसमें आपने ये आपने कितने अच्छे से कनेक्ट किया है। ये एक तरह की केयरिंग भी हो गई, नेचर की केयरिंग, फार्मर्स की केयरिंग, और जो लोग घर पे खाना, हम सब खाना खाते हैं, घर पे अपने-अपने हेल्थ की केयरिंग करना। तो ये परमाकल्चर सिर्फ ऐसा नहीं है कि हमें तकनीक सिखा रहा है, बल्कि हमें कैसे नेचर की केयर, जीने का तरीका। बिल्कुल-बिल्कुल। तो एक बहुत अच्छी चीज लगी इसके बारे में। तो थोड़ा और जैसे परमाकल्चर का मैंने कॉन्फ्रेंस के बारे में भी पढ़ा कि अभी 26 में, अगस्त 22-23 को है। इसी महीने 22-23 तारीख को है। तो आप थोड़ा और बताएंगे हमें कि क्या सॉल्यूशंस हम फार्मर्स के लिए और बाकी सब के लिए लेके आए हैं?
Binay: हां, जो अभी समस्याएं दिख रही हैं जिसकी बातें हो रही हैं, एक है पॉलिटिकल जियोपॉलिटिक्स की बातें होती हैं, कौन देश किससे ऊपर है, सुपर है, नीचे है, वो सब बातें एक तरफ हैं। लेकिन ये जितने भी लड़ाई-झगड़े हो रहे हैं, आप देखो उससे प्रभावित क्या होने वाला है। अगर फ्यूल प्रभावित हो गया, फ्यूल का सप्लाई, ईंधन का जो आपूर्ति है, वो कोई एक देश के जिम्मे नहीं है। वो कई देश मिल के किसी कोई खरीदता है, कोई बेचता है, कोई ये करता है। अगर वो बाधित हो गई तो एग्रीकल्चर हमारी इंडस्ट्री डिपेंडेंट है आज। जो हिट होगा पूरी व्यवस्था में जियोपॉलिटिकल सिचुएशन में, वो होगा भोजन की व्यवस्था सबसे ज्यादा हिट होगी कहीं ना कहीं, डायरेक्टली और इनडायरेक्टली। इसीलिए सब अपना सब देश अपना-अपना जान बचाने में लगे हैं, हमारे प्रधानमंत्री भी वही कर रहे हैं। है ना? गैस का समुचित ये रहे, फ्यूल का रहे, व्हॉटएवर। एक चीज और जानना चाहिए आपको कि जो सबसे बड़ी समस्या होगी, वो जो कौन सा हरमुज वाला है ना वो ईरान में, वहां भारत जितना भी यूरिया यूज़ करता है, शायद पता नहीं कितना मिलियन टन है हर महीने का, वो आप अपने अगेन एआई असिस्टेंट को पूछ सकते हैं, गूगल बता देगा। एक किलो भी यूरिया हम भारत में नहीं बनाते। हम रोज आयात करते हैं या हर महीने आयात करते हैं। अगर वो, और वो बनता है ईरान में। ईरान को मार रहे हैं बम। तो अगर वो ईरान के यहां से निर्यात होना बंद हो गया, तो हमारे यहां एक बूंद यूरिया नहीं आने वाला। और हमारी धरती को ऐसा हमने बना दिया है कि अगर यूरिया नहीं डालेंगे तो नहीं उगेगा, ऐसा कर दिया पिछले 60-70 साल में। ऐसा कर दिया, लाइक यू आर लेस ऑन फ़ूड डिपेंडेंट, यू आर मोर डिपेंडेंट ऑन योर टेबलेट्स। जैसे कोई अह मेरे हैं कई लोग जानने वाले जो 30-40 साल से हाई बीपी की दवाई खा रहे हैं। अब वो दवाई थोड़ी ना वो भोजन है, अब अगर उनको उस समय पर फिक्स से टाइम पर वो दवाई नहीं मिलती तो उनका बीपी बढ़ जाता है, वो पागल की तरह करने लगते हैं। हमारी धरती को भी हमने ऐसा एडिक्ट कर दिया कि सडनली अगर आपने ये रोक दिया तो धरती थोड़ा कंफ्यूज बिहेव करेगी, और उसके साथ आपने अह बीज बदल दिया, ये वो सारा कुछ किया। अब ये सारी तो समस्याएं हैं, इसके बारे में मुझे लगता है सब जानते हैं, और नहीं जानते तो जानना चाहिए। नहीं समस्या को जानोगे तो समाधान कहां से लाओगे? ओके? तो हमारा ये जो कॉन्फ्रेंस होगा, ये परत-दर-परत जितने जगह पर टेक्निकल, नॉन-टेक्निकल सारी चीजें जहां पर लोग फंस रहे हैं, हम प्रयास करेंगे, हम ये गारंटी नहीं करते कि हम हम ब्रह्मज्ञानी हैं, हम सब दे देंगे, ऐसा नहीं। लेकिन क्योंकि हम अपने गुरु के चरण में बैठे हैं तो हमें विश्वास है कि संत के मुखारविंद से जो आएगा, वो दुनिया का कल्याण करेगा। तो हम परत-दर-परत खेती-बाड़ी की उन सारे विधाओं को अनलॉक करेंगे, खोलेंगे जहां पर एक कंज्यूमर अटक जाता है, टिपिकल जो ग्राहक है वो अटक जाता है, एक किसान अटक जाता है, एक व्यवसायी अटक जाता है, एक युवा आदमी अटक जाता है, वो सब अटक जाता है, उस अटकने को हम रास्ता देंगे कि भाई आगे बढ़ो। ओके? ये, अब उसमें होगा क्या, जैसे देखो मान लो आपका हम एग्जांपल लेते हैं, आप जहां से भी हो, आपने कमा लिया अच्छा-खासा, अब स्क्रीन देख के बोर हो गए, तो आपने पैसा जमा कर लिया, अब हमें खेती करनी है, खेत है नहीं, तो क्या करोगे? खेत खरीदने जाओगे। पैसे से जमीन आती है क्या? आज जो भारत का जो चल रहा है, वहां पर सबसे ज्यादा जो कंफ्यूजन है, वो लैंड एंड रेवेन्यू डिपार्टमेंट में है। आप गलत जमीन खरीद लोगे, किसकी जमीन खरीदनी चाहिए, किसकी नहीं खरीदनी चाहिए, कौन सा पेपर चेक करना चाहिए, रेट देख लो, रजिस्ट्रेशन में क्या होगा, आपके यहां पर बिजली का कनेक्शन कैसे आएगा, फेंसिंग कौन सी करनी है, ये सब चीज नहीं जानोगे तो पैसा फंस जाएगा और तुम सदियों तक फिर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के चक्कर लगाओगे। तो हम वहां पर लॉयर्स को लाए हैं जो हमारे स्टूडेंट्स हैं, सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं, कॉर्पोरेट लॉयर्स हैं, टॉप लेवल के, दे ट्रैवल मल्टीपल कंट्रीज, दे विल कम एंड गाइड कि भाई अगर आप धरती खरीद रहे हो कहीं से खेती की, तो ये सारी चीजें ध्यान में रखना। जैसे आपको भी माता-पिता ने जब शहर भेजा पढ़ने के लिए या यहां बेंगलोर भेजा, तो कितनी सारी चीजें बता के भेजी, "बेटा, ध्यान से रहना, बाहर का नहीं खाना, झगड़ा नहीं करना, लोगों से नहीं ऐसे, गाड़ी में बाएं चलना दाएं," इतनी सारी चीजें बना के संविधान बना के दिया। तो वैसे ही ये बताएंगे कि बेटा, जमीन खरीदने जा रहे हो तो इन सारी चीजों का ध्यान रखना। ले लिया जमीन, अच्छे से मिल गई, बाउंड्री हो गई, अब हाउ डू यू मेक योर फार्म ग्राउंडवॉटर इंडिपेंडेंट? भूगर्भ जल पर ही आधारित पूरी दुनिया की खेती है और भूगर्भ जल खत्म होता जा रहा है। ये भूगर्भ का जल आपके लिए नहीं है, आपके लिए नदियां, तालाब, वर्षा का जल, इंद्र भगवान ऊपर बैठे हैं, पानी हम नीचे ढूंढ रहे हैं। और वाट लगा दिया हमने पूरी सृष्टि में, तो पानी के लिए हाहाकार मचा है। अब तो कमोडिटी बना दिया ना, यूएस के इसमें ट्रेड में आ गया ना, वॉटर इज ए कमोडिटी नाउ, यू कैन बुक जैसे तेल कमोडिटी है बाकी जो वॉटर कमोडिटी हो गई। हम वेट कर रहे हैं कि और 500 फीट नीचे जाएंगे तो अमृत निकलेगा वहां से। तो हम बताएंगे ऐसे गुणी जन आएंगे जो पिछले तीन दशक से 50-100 हजार बोरवेल उसको जीवित किया उन्होंने। जितना हो सकता है उनसे, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिखा दे। तो हम बताएंगे कि कैसे आपका ये अह वॉटर इंडिपेंडेंट होगा, माने वर्षा जल पर आधारित होगी। फिर गाय कैसे रखेंगे, पेड़ कैसे लगाएंगे, पैसे कैसे कमाएंगे खेत से? वो भी 1-2 एकड़ जो भारत का एवरेज लैंड होल्डिंग है अभी, वो है। उससे पैसे कमाएंगे, कितना कमाएंगे? जितना एक कॉर्पोरेट वाला कमाता है ना, उतना अगर महीने का और साल का नहीं कमाए तो फिर क्यों आएगा एक यंग आदमी खेती करने? तो इन सारे चीजों पर एक-एक वैसे प्रैक्टिकली इन्वॉल्व्ड एंड इवॉल्व्ड एक्सपर्ट्स को बुलाया, जो हमें एक-एक घंटे, पौने-पौने घंटे का ज्ञान देंगे, फिर उनके साथ जुड़ेंगे और आगे बढ़ाएंगे इस चीज को। ये हमारा कॉन्फ्रेंस का ये ये है। आप अगर कंज्यूमर हैं तो आपको पता चलेगा हमको क्या खरीदना है, कहां से खरीदना है, पहचानना कैसे है। नहीं तो अच्छा दिखने के नाम से हम कुछ भी ले आते हैं, पॉलिश्ड राइस इज वन एग्जांपल। है ना? आपको देखा होगा न्यूज़ आपने रिसेंटली कि ये जो डी-मार्ट है उसके पता नहीं मोर देन 60-70% जो थे डुप्लीकेट उसके प्रोडक्ट थे, सारी चीजों को रीपैकेज करके जो एक्सपायरी चीजों को बेचा था। आई एम नॉट अगेंस्ट डी-मार्ट और समथिंग, बट ये न्यूज़ में आया था तो बोलना पड़ेगा ना। तो एज ए कंज्यूमर यू सफर, तो आप जब यहां दो दिन बैठेंगे इन गुणी जनों के सामने, तो आपको बहुत चीजें पता चलेंगी, "भाई ये सही नहीं है, खरीदने की जगह वो नहीं है, ये है।" है ना? तो एज ए कंज्यूमर, एज ए प्रैक्टिसिंग फार्मर जहां अटकते हैं हम प्रयास करेंगे कि आपकी वो गांठ खुल जाए, फ्यूचर फार्मर वी गाइड यू एंड-टू-एंड, एंड दैट्स ऑल द, यू नो, आवर कॉन्फ्रेंस इज ऑल अबाउट।
Ahana: तो अह भैया, आपने अभी बीच में बोला कि गुरुदेव का मार्गदर्शन भी मिलेगा?
Binay: हां-हां। उन्होंने ही आशीर्वाद दिया, उन्होंने ही ये प्रोजेक्ट को शुरू किया, नहीं तो मैं तो कंप्यूटर वाला आदमी हूं, मैं तो 10 साल इंडस्ट्री में था। गुरुजी बोले, "तुम यहीं रह जाओ," हम यहां रह गए, फिर पहले दिन से मुझे ये काम ये सेवा दे दी, मैं यहां पर हूं, और यहीं पर समय बिता रहा हूं, मुझे नहीं पता हम कहां पहुंचेंगे, लेकिन जर्नी बड़ी अच्छी है।
Ahana: तो क्या गुरुदेव भी इस इवेंट में आने वाले हैं?
Binay: हां जी, हां जी। बिल्कुल-बिल्कुल।
Ahana: वंडरफुल, तो गुरुदेव रहेंगे और बाकी सारे स्पीकर्स जो अपने इस इंडस्ट्री में एक्सपर्ट्स हैं, वो हमें अपना मार्गदर्शन देंगे हमारे साथ ये समय। कितने दिन का है ये?
Binay: दो दिन का है। दो दिन, पूरा-पूरा। सुबह से शाम तक, हम सुबह में थोड़ा ध्यान करेंगे, दिन भर चर्चा करेंगे, अच्छा यू नो, स्वादिष्ट भोजन करेंगे, और सात्विक भोजन करेंगे, और शाम में नाचेंगे-गाएंगे गुरुदेव के साथ, उनके साथ प्रश्नोत्तरी होगी, यू नो, ऐसा करके और इतने सारे लोगों से मिलेंगे। जो प्रतिभागी आएंगे, वो तो भारत से आएंगे अलग-अलग जगहों से, कोई सीखना चाह रहा है, कोई सीख के कर रहा है, यू नो, तो नेटवर्किंग बनेगी। कहते हैं ना, नेटवर्किंग इज न्यू ऑयल, डेटा इज न्यू ऑयल। तो नेटवर्क बनेगा तभी आपको डर नहीं लगेगा, नहीं तो खेती में डर बहुत लगता है। अकेले जब किसी रास्ते पर चलते हैं ना, तो डरावना प्रतीत होता है। पथिक मिल जाए रास्ते में, तो फिर आनंद आने लगता है। यहां पर वो सारे मिलेंगे।
Ahana: हां, और सबके साथ अलग-अलग समस्याएं शेयर करने से एक तो वो जो एक्सपीरियंस में हमारा लॉस होने वाला है रियल टाइम में, वो कम हो जाएगा।
Binay: यस, देखो दिक्कत क्या हो गई कि अभी पिछले कुछ सालों से हमारा जीने का तरीका ऐसा बन गया या बना दिया गया जहां हम हर चीज की सहायता बाजार से लाते हैं या सरकार से लाते हैं। बिल्कुल-बिल्कुल। उस चक्कर में ये समाज जो है ना, निकम्मा बन जाता है। आई मीन, मेरे शब्दों का थोड़ा चयन गलत हो सकता है, लेकिन जब हम दूसरे पर आधारित हो गए ना, बाजार में चीजें बिकती हैं सर, और सरकार 5 साल के लिए आती है, 5 साल में आपकी कौन सी समस्या सुधर ठीक हो जाएगी? बिगड़ी भी इतने सालों से, वो 5 साल में ठीक हो जाएगी? 5 साल बाद सरकार बदल जाएगा, हमें अपने भरोसे करना है। ये जब लोगों से मिलेंगे ना, तो हम एक-दूसरे की सहायता करके जी लेंगे। बिल्कुल-बिल्कुल। नहीं तो सहायता बाजार को हो रहा है, पैसा उसका बन रहा है, आपका क्या हुआ आप जान रहे।
Ahana: भैया, तो अह गुरुदेव आ रहे हैं, परमाकल्चर को लेकर के उनका बहुत फोकस है कि इस देश के किसानों को सपोर्ट मिले, जो आने वाली जनरेशंस हैं उनको उनका फोकस इस तरफ रहे। तो अह उनका विजन क्या है आर्ट ऑफ लिविंग परमाकल्चर को लेकर के?
Binay: हां, नहीं, जिस तरह की परेशानियां खेती में आ रही हैं, पहला है लोग नहीं मिलते, मतलब लेबर, जो मैनपावर चाहिए वो नहीं मिलते। बाकी कोई इंडस्ट्री नहीं है जहां पर उनको मैनपावर नहीं मिलता, कितनी भी मशीन लगा ले रहे हैं मैनपावर चाहिए होता है। दूसरा, मार्केट पर डिपेंडेंसी बहुत बढ़ती जा रही है हमारी खेती की, इंडस्ट्री पर डिपेंडेंसी बढ़ती जा रही है। परमाकल्चर इन सब चीजों को कम करता है। खुदाई कम करनी है, धीरे-धीरे उसके बाद जीरो कर देंगे। बोरवेल से पानी ले रहे हो ठीक है शुरुआत में, लेकिन तालाब भी बना दो, वर्षा के जल का संचय करो धीरे-धीरे। तो गुरुदेव हमेशा से चाहते हैं कि खेती हमारी इस तरफ जाए, जहां नैसर्गिक हो और प्रकृति पर आधारित खेती हो। है ना? तो और उसी के प्रयास में हम लोग एक दशक से लगे हैं, अब उनकी गति को नहीं मैच कर पाए हैं, बट ठीक है, कर ही लेंगे।
Ahana: तो भैया, काफी सारे लोगों का रहता है कि कुछ लोग इसको फुल टाइम अपना काम बनाना चाहते हैं, जैसे हमारा करियर है, तो हम सॉफ्टवेयर्स बनाते हैं और एआई एजेंट्स बनाते हैं, तो हमारा काम यही है। बट कहीं ना कहीं यहां पे फार्मिंग में फुल टाइम एक अपना करियर बनाना, फैमिली को संभालना, तो यहां पर फाइनेंशियल थिंग्स आती हैं, तो वेल्थ को लेकर के परमाकल्चर के थ्रू और करियर वाइज आप थोड़ा गाइड करेंगे कि कितना हम फ्री हो सकते हैं और मतलब जो एक तरह का डर है करियर को लेकर के, उसको थोड़ा आप...
Binay: समझ गया। अब देखिए, अगर हम आपका एग्जांपल लें, आपने जब से स्टार्टअप शुरू किया, आपको समय लगा ना एस्टैब्लिश होने में? या पहले दिन से ही आप बिलियनेयर बन गए? नहीं ना? एंड यू हैड योर प्लानिंग इन प्लेस कि हमारा इतना साल लगेगा, 2 साल, 4 साल लगेगा। अब बताओ, उतने में हो गया क्या उतने साल में या समय ज्यादा लगा?
Ahana: नहीं भैया, ज्यादा लगा। अभी भी प्लानिंग में रहती हूं मैं प्रॉपर।
Binay: है ना? और बहुत सारे वेरिएशन आते रहते हैं, समस्याएं आती रहती हैं। तो जब आप इंडस्ट्री में जाके पढ़ाई में आपने 20 साल समय दिया, दिया ना? माता-पिता ने, सबके माता-पिता ने 20-22 साल तक बिना ये जाने हुए, ये बड़ा होके क्या करेगा या क्या करेगी, अपना जी-जान लगाया। इतना पेशेंस था ना? तो फिर जब खेती में आते हैं तो तब ये क्यों नहीं सोचते कि ये भी थोड़ा समय लेगा? और ये फ़ास्टेस्ट रिटर्न अगर है तो एग्रीकल्चर का है, क्योंकि सब्जियां 3 महीने में, पाल पत्ते जो है ना सब्जी वाले, पत्ते वाली सब्जियां डेढ़ महीने में आ जाती हैं सर। और जब हम खेती से पैसा कमाने की बात करते हैं तो हमारा कहीं ना कहीं पूरे वर्ल्ड में, जहां तक मुझे ध्यान में आता है, कि हर जगह ये एक गलत धारणा बन गई है कि ज्यादा उगाओगे तो ज्यादा कमाओगे। पैसा तुम्हारा बन रहा है, आपकी कंपनी का पैसा बन रहा है आपके प्रोडक्ट को बेचने से। absolute. खाली बनाने से नहीं बन रहा। नहीं-नहीं। बना के 100 तरह के अलमीरे भर दो और बिक ही नहीं रहा तो क्या होगा? वैसे ही खेती में पैसा बनेगा बेचने से। कौन बेच पाएगा? अब अगर आप प्रोडक्शन के इंचार्ज हो या किसी ने प्रोडक्शन का इंचार्ज लेके रखा है आपके ऑफिस में, तो मार्केटिंग वाला अलग है ना कि नहीं है? absolute. और वो प्रोडक्शन वाला मार्केटिंग वाले को ज्ञान देगा क्या? नहीं देगा ना? और सबसे हाईएस्ट पेड कौन है? मार्केटिंग वाला, क्योंकि कमा के वो दे रहा है। तो खेती में जब प्रोडक्शन इतना हो रहा है, और इसको बेचने के लिए आपको नहीं लगता कि एक्सपर्टाइज की जरूरत है? और दूसरी तरफ से देखिए कि आपका कोई प्रोडक्ट है, पूरी दुनिया इसकी कस्टमर है क्या? नहीं ना? सिलेक्टेड कस्टमर्स होंगे, 0.0001% होंगे। 2-4 हजार आपके कस्टमर बन जाएं तो यू आर ए बिलियनेयर। लेकिन भोजन एक ऐसा प्रोडक्ट है जिसकी पूरी सृष्टि कस्टमर है। वाओ! दैट्स ट्रू। और कभी कम नहीं होगा। आज मैं कुर्ता पहन रहा हूं, कल को टी-शर्ट पहन लूं, परसों कुछ और पहन लूंगा, सब बदलेगा, गाड़ियां बदलेंगी, उपकरण बदलेंगे, हो सकता है हमारा ये 5जी और ये जो लेके बैठे हैं लैपटॉप वगैरह सब बदल जाए। भोजन नहीं बदलेगा। हमारी अंतड़ियां नहीं बदली, हमारे चार हाथ नहीं हो गए, अगले बच्चे के आंख यहां पर नहीं आएंगे। मानव शरीर और मानव शरीर की आवश्यकताएं उतनी ही हैं और शुरुआत भोजन से होता है। तो एक ऐसा प्रोडक्ट जब आपके हाथ में आता है जहां कस्टमर का अंत नहीं है, एव्री लिविंग बीइंग इज योर कस्टमर, तो व्हाई यू थिंक यू विल इंकर लॉस? आपको उसमें हानि होगा? हानि हो रहा है, इसका मतलब है आपको बेचना नहीं आता। आपने गलत आदमी को दिया है बेचने के लिए। तो ये जो लोग नए लोग आएंगे कि हम कैसे कमाएं, तो भाई जितना तुम मार्केटिंग में और टारगेट ऑडियंस और पता नहीं पेड प्रमोशन ये सब करते हो, यहां पेड करने की जरूरत ही नहीं है। आप सीधा कस्टमर्स को पकड़ो, और देखो 20-25 कस्टमर को पकड़ लिया ना तो 5-10 5-10 एकड़ का खेत वहीं खप जाएगा। और ज्यादा नहीं मांगना उनसे, तुम तो बोलना जो मार्केट में जो रेट में आटा खरीद रहे हो, चावल ले रहे हो, मुझे उतना ही दे दो, 8 गुने का फर्क होता है। ₹5 किलो का खीरा किसान का ₹40 में कस्टमर खरीदता है, मिनिमम।
Ahana: ज्यादा है भैया।
Binay: ज्यादा है। 8 से 10 गुने का अंतर होता है, अगर आपने उतना किसान को डायरेक्ट दे दिया ना, तो एज ए कंज्यूमर आपको महंगा नहीं पड़ा, लेकिन एज ए फार्मर मेरे को कुछ 8 गुना ज्यादा मिल गया। मेरे बाल-बच्चों को तो क्या, मैं सारे आसपास के लोगों को, पूरे गांव को बिठा दूं खेत में। आपको लग रहा होगा कि कहना आसान है, करना आसान नहीं, तो आप ये बताओ एक काम बताओ जो करने में बड़ा आसान था और उससे आप बड़े बिलियनेयर बन गए? चाहे आपकी साधना हो या पढ़ाई हो या पैसे कमाने हो, सब में समय लगा। उसमें आपका मन लग रहा था तो समय का पता नहीं चला, इधर भी जब मन लगेगा ना तो समय का पता नहीं चलेगा। घाटा नहीं होगा, ये आप ये चीज को धंसने दीजिए। और सारे युवाओं से तो मैं यही कहूंगा कि भाई प्लान करके कर लो, इसीलिए हमारे ऑडियंस में पढ़ाता ही हूं ये युवाओं को और फ्यूचर फार्मर्स को। मैं प्रैक्टिसिंग फार्मर्स को कोई ज्ञान देने नहीं जाता, उनके पास मैं ज्ञान लेने जाता हूं।
Ahana: तो किस-किसको आपने जैसे बताया, मुझे तो आपकी बात सुनके ऐसा लगता है कि सिर्फ किसानों के लिए नहीं है हम सब के लिए। हम सबको भी क्लास अटेंड करनी चाहिए प्रॉपर। क्योंकि हम खा रहे हैं, हमें पता तो होना चाहिए कि हम क्या खा रहे हैं। हमें परिवार की हेल्थ और...
Binay: नहीं, मैं लोगों को कहता हूं, लूजली कहता हूं कि जब मोबाइल खरीदने में, एक मोबाइल लेना हो तो पूरा परिवार पंचायती बिठाता है, है ना? इतने का लें कि वो कैमरा लें कि इतना जीबी लें कि आईफोन लें कि वो लें, तो फिर जब भोजन के लिए क्यों आप ड्राइवर को या किसी को बोलते हैं भाई या ब्लिंकिट को बोल देते हैं दे जाना? यही मिलता है जी, ये देखो। तो जिस स्पीड से भोजन खरीद रहे हो, उससे ज्यादा स्पीड से दवाइयां पहुंच रही हैं आपके पास। इसमें डिसीसिव होना आवश्यक है, नहीं तो ये हम लोग जो हैं ना, वो कड़ी हैं दो जनरेशन की। पिछले जनरेशन को जीते हुए हमने देखा है, अगले जनरेशन को हम सिखा सकते हैं। अगर हमने वो जिम्मेदारी नहीं ली, तो अगले जनरेशन को बताने वाला कोई नहीं होगा कि जिया कैसे जाता है, उगाया कैसे जाता है। वेनेजुएला हो जाएंगे हम, आलू उगाना भूल गए लोग वहां पर। अभी हाल-फिलहाल में इसी साल या पिछले साल गुरुदेव वेनेजुएला गए, तो वहां एक वाईएलटीपी कंडक्ट करवाया और वहां जो प्रोजेक्ट दिया, वो खेती सिखाने का प्रोजेक्ट है। फ्री में देते-देते पूरा देश को निकम्मा बना दिया, बच्चा पैदा हुआ और जिस उसके जीवन का जो अंतिम दिन होगा उसके मां-बाप को ₹1 के लिए सोचना नहीं। निकम्मा बना दिया, खेती भूल गए, और जब अभी जो भी आया है वहां पर गड़बड़ हुआ, तो अब भोजन के लिए तड़प रहे हैं। तो इस चीज में लगना पड़ेगा, जानना पड़ेगा कि होती कैसे हैं चीजें, आप करना मत, लेकिन ये जानना आवश्यक है ताकि आपको कोई बेवकूफ नहीं बनाए।
Ahana: तो भैया, आजकल जैसे कि जो लोग एग्रीकल्चर की पढ़ाई कर रहे हैं या फिर जो लोग अह फार्मर्स हैं जो ऑलरेडी प्रैक्टिस करते हैं, तो अह क्या उन्हें भी आकर के इस कॉन्फ्रेंस में आकर के...
Binay: 100%, 100% आना चाहिए क्योंकि किसान सुनते ही सबके मन में यही आता है, गरीब होगा, लाचार होगा, उसके पास कपड़े नहीं होंगे ढंग के, यही सब होता है ना? जबकि उसके पास वो प्रोडक्ट है जिससे सृष्टि का जान बचता है, सारे जीवों का जान बचता है, वो उसके पास है, फिर भी उसके शरीर को ढकने के लिए कपड़े नहीं हैं। तो अगर किसानों की परिभाषा बदलनी है, अगर हमें हमारे दादा-पिताजी के जो जो काम था उस पर अगर गर्व लेना है, तो हमें ये यहां आ के समझना पड़ेगा, सीखना चाहिए कि कैसे एक आदमी 1 एकड़ अपनी जमीन होते हुए भी 10,000 किसानों को डायरेक्ट कस्टमर से जोड़ दिया और उनका टर्नओवर 400 करोड़ से ज्यादा का है। वाओ! आज भी 1 ही एकड़ खेत है उनके पास, उनका इनकम 400 करोड़ नहीं है, लेकिन उनका बेटा और बेटी और बहू तीनों कॉर्पोरेट की हाई-फ्लाइंग जॉब छोड़ के पिताजी को मदद कर रहे हैं ये पूरा चेन रन करने में, और तीनों को उतना इनकम हो रहा है जितना कॉर्पोरेट में पर मंथ नहीं मिलता था। और वो खेती से हो रहा है, वो भी रसायन-मुक्त खेती से हो रहा है, नॉन-केमिकल फार्मिंग से हो रहा है। तो ये बाहर दुनिया आपको बहुत कुछ बताएगी, लेकिन कौआ कान लेके भाग गया, तो कान को पहले पकड़ के देखोगे है कि नहीं, या कौए के पीछे भागोगे? हम कौए के पीछे भाग रहे हैं। यहां ऐसे जब गुणी जनों को मिलोगे, जब एकदम प्रत्यक्ष में वो उदाहरण देखोगे, तो एक अलग तरह का विश्वास जगेगा, तब समाधान पर काम होगा, है ना? तो आप आइए, अवश्य आइए, मिलिए ऐसे लोगों से। देखिए, विद्या प्राप्ति के 9 साधन हैं, उसमें जो सबसे पहला साधन है वो देशाटन है। यस। भ्रमण। सबसे अंत वाला है बुकिश नॉलेज, किताब पढ़ के, वो नौवें पर है। तो जब आप देश- विदेश आप कहीं दूसरे स्टेट से, कहीं दूसरे शहर से यहां आ के देखेंगे, आश्रम में बिताएंगे, इतने लोगों से मिलेंगे तो बहुत चीजें सुलझेंगी यार, गुरु आता ही सुलझाने के लिए है।
Ahana: भैया, थोड़ा स्टार्टअप्स की तरफ देखते हैं, इंडिया ने कदम रखा है, तो एग्रीकल्चर के भी बहुत सारे स्टार्टअप्स हैं। मेरे क्योंकि मैं अह कंपनी रन करती हूं तो मेरे ही पहचान में बहुत सारे स्टार्टअप्स हैं। तो कहीं उनको एक कंपटीटर की तरह दिखे, उसका क्या सॉल्यूशन है? क्योंकि मुझे लगता है कि यहां पर यूनिटी की जरूरत है, तो आप इसको कैसे देखते हैं?
Binay: अह जहां तक मेरा नॉलेज है, आई माइट बी 100% रॉन्ग, मैं डिस्क्लेमर के साथ बोलता हूं, जितने लड़कों ने बिना एग्रीकल्चर की टेक्निक्स, भोजन उगाने का जो तकनीक है, फसल का सीजन या व्हाटएवर जो भी है, उसको बिना जाने जो एग्रीकल्चर का स्टार्टअप शुरू करा ना, उससे हमारी धरती का भला नहीं हो रहा है, किसानों का भला नहीं हो रहा है, उन स्टार्टअप का भला जरूर हो रहा है। वो अलग-अलग प्रोडक्ट बनाते हैं और वो फार्मर को अपना क्लाइंट बना देते हैं कि हम कहते हैं हम फार्म हम किसानों का मदद करने के लिए हमने ये एक सेंसर बनाया है, हमने ये रोबोट बनाया है, हमने ये ड्रोन बनाया है। अरे, तुमको तुमने अपना बिजनेस खड़ा किया और तुम वहां पर कस्टमर ढूंढ रहे हो। इतना ही है। वो उससे खेती का भला नहीं हो रहा है, उससे किसी इंडिविजुअल और किसी ऑर्गेनाइजेशन का भला हो रहा है, और चूंकि दुनिया में सबसे बड़ा ये बिजनेस है एग्रीकल्चर और फ़ूड बेस्ड इंडस्ट्री, तो उसी इंडस्ट्री के तुम पार्ट बन रहे हो, किसानों वाले पार्ट को सहभागिता नहीं हो रही तुम्हारी, तुम्हारा फ़ूड पैकेजिंग और वहां पर बन रहा है जहां पर लोग बिलियनेयर्स बन गए। लेकिन जो आदमी इन चीजों को समझ के, खेती होती कैसे है, इसमें चैलेंजेस क्या हैं, फसल उगाना ज्यादा महत्वपूर्ण है या धरती की उत्पादक शक्ति बढ़ानी ज्यादा इंपॉर्टेंट है, उन चीजों को समझ के जो स्टार्टअप लगेगा ना, वो लंबा रेस का घोड़ा होगा, उससे किसान भी खुश होंगे, और किसान जब खुश होंगे, कहते हैं ना कि द बेस्ट जो एम्प्लॉई जो है, एम्प्लॉयर वही होता है, बेस्ट बिजनेसमैन इज द वन हू मेक्स हिज एम्प्लॉई ए बिजनेसमैन। जो अपने अह क्या बोलते हैं, जो उसके काम करने वाले लोग हैं, उसको भी जो बिजनेसमैन बना देता है ना, उसके पास लोगों की कमी नहीं होती। तो तुमने अगर किसानों को समृद्ध करना शुरू कर दिया, तो तुम्हारे पास किसानों की भी लाइन लगी रहेगी और कस्टमर भी तो आएंगे, और तुम चेन बन जाओगे, वहां पर उनका कनेक्शन बन जाओगे। तो वो ज्यादा लंबा चलेगा, ऐसा मुझे लगता है।
Ahana: भैया, जैसे कि इसमें अह हमारी डिमांड, लोग जनरेशन बढ़ रही है, फ़ूड की डिमांड बढ़ रही है, है ना? तो फ़ूड की जो सप्लाई एंड डिमांड को हम एक बिजनेस टर्म्स में देखते हैं, है ना? पेस्टिसाइड्स कहीं ना कहीं फसल को जल्दी उगाते हैं, है ना? उसके साइज बड़े होते हैं। आप प्लीज नाराज मत होइएगा, हम अपनी... बिल्कुल। तो हम जैसे परमाकल्चर फार्मिंग के जरिए अह सब्जियों को और बेहतर पाएंगे और उसका टाइम ड्यूरेशन में क्या फर्क पड़ेगा? क्या वो टाइम ड्यूरेशन से हमें जल्दी मिलेगा या फिर हमें और थोड़ा लेट मिलेगा? क्योंकि कहीं ना कहीं लेट मिला तो वो डिमांड में भी...
Binay: हां, मैं आपके प्रश्न को थोड़ा ठीक कर दूं। जी। यहां लेट और जल्दी वाला चीज जो है ना, ये इंडस्ट्री ने ला दिया। हां। अभी जैसे देखिए अह जब मोबाइल लॉन्च हुआ तो इनकमिंग और आउटगोइंग का खर्चा था, फिर भी हम उतने ही खुश थे जितना आज एक लेटेस्ट मोबाइल और विथ 5G, 6G के साथ खुश हैं, हैं? अरे, घुमाएंगे और भले और तब भले समय देखते थे कि ये कट करो, कट करो नहीं तो स्लैब्स थे ये वो। बढ़ता गया, क्या बढ़ता गया? पहले चार्जेस खत्म हुए, फिर मोबाइल एज ए इंस्ट्रूमेंट इटसेल्फ बदलने लगा, स्क्रीन आ गया, उसकी स्पीड बढ़ने लगी। जितना आपके फ्लॉपी ड्राइव में जगह नहीं थी, उस वक्त रैम-रोम जो हम पढ़ते थे, उससे ज्यादा तो एक छोटे से मोबाइल में होता है, कितने पता नहीं 1 टीबी तक का सुना है कि आने लगा है, एन ऑल दैट होने लगा है। इंडस्ट्री आपकी गति को बढ़ाती है, लेकिन दिशाहीन कर देती है। अगर आपका इफ द डायरेक्शन एंड द स्पीड इज नॉट टुगेदर, यू विल क्रैश। बहुत तेज दौड़ते हो, लेकिन दौड़ना उस तरफ था, तुम इधर चले गए, तो तुम जीतोगे क्या? नहीं। नहीं, तो दिशा के साथ गति दोनों समाहित होनी चाहिए। इंडस्ट्री हमारी गति को बढ़ा रहा है, हमारी दिशा दिशाहीनता है, प्रकृति के इकोलॉजी के हिसाब से देखो, इकॉनमी इज नॉट सपोर्टिंग इकोलॉजी। ठीक है ना बात? अब जब सिंथेटिक केमिकल्स, पेस्टिसाइड्स ये सब की बातें हैं, तो उन्होंने इंजेक्शंस बना के दिए कि इतना छोटा अ लौकी या मान लो इतना छोटा लौकी, उसमें इंजेक्शन दे दो सुबह इतना बड़ा हो जाएगा। आप बताओ, आपके सामने अगर इंजेक्शन दे के वो बड़ा करके दो दिन में दे दे तो खाओगे क्या? नहीं। कोई एक पढ़ा-लिखा या कोई भी जो अपनी बुद्धि में है, वो प- खाएगा क्या? नहीं खाएगा ना? लेकिन इस प्रोसेस को छुपा देते हैं तो आपको लगता है ये भी तो वही साइज है, इसमें ग्रीनरी बढ़िया है, उसमें कलर म- ये सारी चीजें यूट्यूब में उपलब्ध हैं, ये सब देख सकते हैं। तो जो प्रोडक्शन वर्सेस पापुलेशन की बात आती है ना, वो बड़ा ही कमजोर है। अब देखो एक तरफ ग्लोबली देखो ना, तो दो डेटा मैं आपको देता हूं। ये मुझे लगता है कि सब लोगों को ना हमेशा आपको याद रखनी चाहिए और ये यथार्थ है, मैं कोई अपना को कुक्ड ये नहीं बता रहा। एक कहते हैं कि अह ग्लोबल पापुलेशन जो है वो अब उसके बढ़ने की गति कम होती जा रही है। उतना उस स्पीड से नहीं पापुलेशन हमारा बढ़ रहा है जो एक्सपेक्टेड था, जापान इज वन एग्जांपल। दे आर रनिंग शॉट ऑफ़, उनका पापुलेशन कम हो रहा है, बच्चे ही नहीं हैं। अभी भारत से हुआ ना हमारा आर्ट ऑफ़ लिविंग के साथ एक एमओयू हुआ जहां पर डेढ़-दो लाख बच्चों को यहां से वहां भेजा जाएगा जो जापानी जानते हैं और लोगों को वहां हेल्प करेंगे, आई एम नॉट एज ए नौकर, बाल-बच्चे बनके उनके रहेंगे। उनके घरों में बस हस्बैंड-वाइफ हैं, बच्चे नहीं हैं। अगली जनरेशन मिसिंग है।
Ahana: इवन आई हर्ड दिस।
Binay: है ना? एक वो है, भारत का भी जो पापुलेशन बढ़ने का जो एक्सपेक्टेड रेशियो था वो वहां नहीं है, आप अपने आजू-बाजू में देखिए ना। लोग एक बच्चे से खुश हैं, बच्चे नहीं हैं तो उसमें खुश हैं, शादी नहीं करना चाह रहे, वो सारा कुछ चल रहा है। दूसरी तरफ कहते हैं कि पूरी सृष्टि में 87% ऑफ द फर्टाइल लैंड इज बीइंग यूज्ड टू ग्रो फॉडर, 87% धरती पर घास उगाया जा रहा है। और घास को कौन खाता है? जानवर खाते हैं, और जानवर को इंसान खा जाता है। माने मीट इंडस्ट्री को सपोर्ट करने के लिए 87% धरती का उपयोग हो रहा है। अगेन वन ऑफ द इंजीनियर्स ऑफ अ इंटरनेट शैलेश राव, उनका ये डेटा है, आप लोग गूगल कर लेना जा के। ही मेड एन वेबसाइट avoiddayzero.com, वो अब फंक्शनल नहीं है लेकिन उसके कुछ क्लिप्स मेरे पास हैं। उन्होंने बोला, ऐसे कोई नहीं राह चलता आदमी बोल दे जिसके ऊपर आप विश्वास नहीं करोगे। अब 87% धरती पर घास उग रहा है, 13% धरती पर ही अनाज हो रहा है। तो और 13% धरती पर जो या 20% ही रख लो, जितना उग रहा है ना उसका 1/3 बर्बाद हो रहा है। फिर भी इस पूरी दुनिया में जितना पापुलेशन है उसको भोजन मिल रहा है, और अगर नहीं मिल रहा है तो ये जन वितरण प्रणाली में दोष है, धरती में दोष नहीं है। अब सोचो पूरी सृष्टि में अगर अनाज उगने लगे, जितना आज पापुलेशन है ना, उससे 7 से 8 गुना ज्यादा पापुलेशन इस धरती पर रह सकता है। ओके। तो किसी मीट इंडस्ट्री वाले को नॉन वेजीटेरियंस को ये बोलने जाओगे कि भाई तुम थोड़ा अह मांस-वांस खाना बंद करो, तो आपको ऐसे लॉजिक्स देगा ना बोलेगा मैं ही एक बेवकूफ हूं जो मांस नहीं खा रहा, आप उसको सुनाइए ये। है ना? तो ये जो पापुलेशन प्रोडक्शन का है, ये बड़ा वीक डेटा है, ये इंडस्ट्री ने हमारे ऊपर दिया सो दैट प्रोडक्शन बढ़ाने के जो उनके तरीके हैं ना जिससे उनका पैसा बनेगा, वो उनका बन जाए, उनका बन गया। हमारी लाइन हॉस्पिटल में लग गई और वो ऐश कर रहे हैं, अपने लिए अलग उगाते हैं केमिकल फ्री। है ना? और कहते हैं बिल गेट्स के ऑफिस में या मॉनसेंटो के ऑफिस में हर जगह नेचुरल बनता है खाना, नेचुरल उगता है, पूरी दुनिया में से पेस्टिसाइड्स बेचते हैं, सिंथेटिक केमिकल्स बेचते हैं, विडीसाइड्स बेचते हैं, एंड दैट लीड्स टू सुसाइड। यस, यस। है ना? तो वो वो सब थोथलेबाजी है, और आप इतना बड़ा-बड़ा डेटा, बाकी किसी चीज में डेटा देखते हो क्या? जब आप अपने अपना तुम ये चलाए, अपनी कंपनी खोले, तुमको लगा कि तुम पूरे दुनिया पूरे इंडिया को तुम दे दोगे नौकरी? नहीं ना, तुम 10-20 लोगों से शुरू किया या 10-20 हजार तक जाओगे, एक जीवन में इतना ही कर सकते हैं। तो एज ए फार्मर क्यों सोचने लगते हो पूरे दुनिया को हम ही खिलाने बैठे हैं? टू। पूरे दुनिया का ठेका तुमने लिया है, तुम अपने बाल-बच्चों का पेट भर लो, तुम्हारे वजह से 10-20 लोगों का पेट भर जाए उतने में खुश रहो ना भाई, दुनिया चलाने के लिए भगवान देखेगा। ये सारे लॉजिक्स ऐसे हैं ना जो लोगों को बेचारे भोले-भाले किसान को हम चुप करा देते हैं। अरे नहीं, जा- डालना ही पड़ेगा, मेरा रिसेंट में पाला पड़ा है एक जस्ट रिटायर्ड आईएएस ऑफिसर से। हमारे कोर्स में थे। भाई, हाईजैक कर लिया उन्होंने, बोला, "नहीं-नहीं, हम तो भीखमंगे थे, अमेरिका ने हमें खाना दिया तो हम बच गए, हमारे पास कुछ भी नहीं था।" भाई, तो जितना इतिहास-भूगोल हम पढ़ते हैं सब आग लग गई वहां पर, जस्ट रिटायर्ड, दैट पर्सन हैड अ सर्व्ड एज ए कलेक्टर इन मेनी डिस्ट्रिक्ट्स ऑफ आवर कंट्री, पॉलिसी मेकिंग में थे, वो बता रहे हैं कि हमारे पास कुछ नहीं था, और बिना जहर के हम उगाएंगे तो हम भूखे मरेंगे। तो बोले, "तो फिर आप सीखने क्यों आ गए परमाकल्चर? जहर से उगा ही रहे थे ना, खाओ।" बोले, "नहीं-नहीं, अपने लिए उगाने के लिए तो करना पड़ेगा ना बिना जहर का।" व्हाई दिस एंबिगुइटी, ये हिपोक्रेसी? ये सब बोल के किसान जैसी भोली-भाली प्रजाति को बेवकूफ नहीं बनाइए। और आप किसान बनना चाहते हैं, सारे फैक्ट्स-फिगर्स बस समझ के सीख के आइए, आई टेल यू, यू विल रूल द वर्ल्ड। द वर्ल्ड शुड बी रूल्ड बाय इकोलॉजी एंड द फ़ूड, नॉट बाय इकॉनमी एंड द डेवलपमेंट एंड ऑल दैट, आई डोंट आई एम नॉट अगेंस्ट दैट, बट इफ इकॉनमी इज बेस्ड एंड बैकड अप बाय इकोलॉजी, इट विल रन फॉर लॉंगर टाइम। बिकॉज़ व्हेन इकॉनमी स्टार्टेड इकॉनमी-बेस्ड इकोलॉजी इज इकोलॉजी इज डाइंग। पर्यावरण जब इकॉनमी के भरोसे चलने लगा ना कि ज्यादा पैसा होगा, ज्यादा रोड होगा, ज्यादा ये होगा, इकोलॉजी खराब हो गई हमारी। जो पानी बोतल में नहीं है, उस पर आपको भरोसा नहीं है पीने का, और जो पी रहे हैं ना बोतल का पानी, उसमें भी आपका भरोसा नहीं है। आप जानते हैं कि कैंसरस हो सकता है, भाभा एटॉमिक रिसर्च इंस्टीट्यूट के साइंटिस्ट्स ने कोविड के थोड़े पहले 2018-19 में ओवर द काउंटर रखे हुए 80 बॉटल्स के सैंपल लिए थे, 18 डिफरेंट ब्रांड्स के, ओके? 72% बॉटल्स को पाया कैंसरस था वो पानी। ओवर द काउंटर वो बिक रहा था। तो पानी की हालत ऐसी हो गई, हवा की हालत आपको पता है, आश्रम आते हैं तो सडनली लंबी सांस चलने लगती है, भोजन के बारे में पता ही है क्या हो गया क्वालिटी का, नहीं पता है तो किसी हॉस्पिटल में जा के देखिए, 10 साल के बच्चों का हार्ट ऑपरेशन हो रहा है। आई डोंट वांट टू अपीयर सेडिस्टिक, बट व्हेन इट हैज़ टू यू हैव टू लुक फॉर द सॉल्यूशन, डायग्नोस द प्रॉब्लम फर्स्ट, एंड डायग्नोस इट द वे इट शुड बी डन। परत-दर-परत खोल के देख लो तो पता चलेगा कहां पर कांटा गड़ा है, कहां पर गोली लगी है, कहां पर घाव है, कहां पर मवाद है, सब सब को ठीक करेंगे। तो बात ये है।
Ahana: तो भैया, आपको क्लियर लगता है फिर ये जो प्रॉब्लम आई है अचानक से, मतलब इतने बड़े लेवल में, काफी लॉस दिख रहा है मुझे जो आपने बताया, चाहे वो फार्मर्स को लेकर के हो, चाहे वो एग्रीकल्चर पूरा जो हमारा ऑलरेडी सेटअप था इंडिया का, वो एक बहुत बड़ा लॉस है ये, छोटा-मोटा नहीं है जो अभी हम देख रहे हैं। ये कैसे ठीक होगा? इसमें हमें किस तरह के सारे मतलब हिंदुस्तान के लोगों से क्या सपोर्ट चाहिए है, और कितना वक्त हम सब मिलकर के इस पे काम करेंगे तो कितना वक्त लगेगा हमें वापस रिकवरी करने में?
Binay: हां, वो एग्जैक्टली टाइमलाइन में तो नहीं बता सकते, लेकिन गुरुदेव कई बार एग्जांपल देते हैं कि अगर घर 100 साल से अंधेरे में था, तो उसमें उजाला लाने के लिए 100 साल नहीं लगेगा, एक तीली जलाएंगे जैसे प्रकाश आया तो अंधेरा खत्म, द एब्सेंस ऑफ डार्कनेस इज लाइट, ओके? एंड वाइस वर्सा। तो चीजें बिगड़ गई हैं, लेकिन क्या है धरती को भू-देवी कहा हमने, ललिता सहस्रनाम में भू-देवी आता है, गौ माता आता है शब्द। तो मातृ स्वरूप है, तो इतना जहर डालने के बाद भी वो भोजन उगा के दे रही है, उसी भोजन से हम जीवन निर्वाह कर रहे हैं, ये भी तो सत्य है, है ना? और तो ज्यादा सेडिस्टिक होने की जरूरत नहीं है, लेकिन जागरूकता बड़ी आवश्यक है। समाज के और देश के स्तर पर कुछ चीजें बिगड़ी हैं, तो खाली पॉलिसी से सही नहीं होगा। पॉलिसी में तो बना लिया कि आप किसी का जान नहीं ले सकते, हत्या नहीं कर सकते, नहीं तो आप आपको फांसी हो जाएगी, अब बताओ कहीं किसी दिन हत्या होना रुक गया क्या? माने क्या, खाली पॉलिसी बनाने से नहीं होता, कानून बना देने से नहीं होगा, ये जन-जागरण की बात है, इसीलिए संतों का आना इस सृष्टि पर बड़ा ही रेगुलर रहा। समाज सुधार के लिए एक-एक अलग-अलग रूप में, अलग-अलग समय पर लोग आते रहे। गुरुदेव आए हैं और भी संत आए हैं इसी चीज को करने के लिए, लगेगा समय, लेकिन जल्दी होगा, सुधार हमेशा होता है जल्दी। देखो आप सब पढ़े-लिखे लोग हैं, कहते हैं कि एक बच्चा चार-पांच दिन पहले मेरे से उलझ गया, यहीं स्कूल का बच्चा था, बोला, "इतना केमिकल वगैरह है तो हम तो मर जाना चाहिए अभी तक।" तो उसको बताया, "बेटा, डोज की भी बात होती है," है ना? हम डायरेक्ट फिनोल और हारपिक नहीं पी रहे हैं या कोई पॉइज़न हम डायरेक्ट सिंथेटिक केमिकल्स डायरेक्ट नहीं ले रहे हैं, इनडायरेक्टली ले रहे हैं। तो फॉर ए केमिकल इन योर बॉडी टू टर्न इनटू डिजीज, इट नीड्स इट टेक्स 25 टू 30 इयर्स। इसीलिए जो आदमी पूरे साल एकदम कोई एडिक्शन नहीं, आदत नहीं, शुद्ध खाया, मरते समय उनको पता नहीं जानलेवा बीमारियां हो रही हैं, तो वो लास्ट 25-30 साल से गड़बड़ाया है। तो जो 25-30 साल से जो बीमारी बन गया, उसको ठीक करने के लिए 30 साल नहीं लगेगा। इससे डिपेंड करता है कितना जल्दी हम इस चीज में घुसते हैं, कितना जल्दी हम ये, इसीलिए इन संचार माध्यमों का सही उपयोग हो, मैं इस कॉन्फ्रेंस के लिए कई सारे यूट्यूबर्स और क्रिएटर जो भी शब्दावली प्रयोग करते हैं, उन सबको बोल रहा हूं कि भाई थोड़ा इस चीज को भी प्रमोट करो, क्योंकि भरे पेट से ही तुम तुम कुछ कंटेंट बना पाओगे, भूखे भजन कहां होगा भाई? तो जितना ज्यादा हम बातें करेंगे, देखो सिंपल सी बात है, हमारे इस रोड पर दारू के दो दुकान हैं, एक का नाम है टॉनिक, और एक का नाम है सिरप, और वो दुकान को दूर से देखोगे ना तो लगेगा माय गॉड, रात में देखो क्या चमकता है, मतलब लगेगा कोई शादी का मंडप बना हुआ है। तो जब दारू को टॉनिक और सिरप करके बेचा जा सकता है, ये शुद्ध भोजन उगाने की बात है, हम ऑ फैक्टर को ऑसम करना चाहते हैं ये डब्लू एयर, वॉटर, अर्थ को, तो हमें क्यों शर्म हो? हमारी चीजें जो हैं शेमलेसली सिंपल और अमेजिंगली ड्यूरेबल हैं, हम क्यों नहीं उसको बेचें, हम क्यों नहीं उसके बारे में बातें करें, इसमें शर्म किस चीज की? जब गुरुदेव घूम-घूम के दुनिया को बता सकते हैं कि भाई सांस लो, सांस छोड़ो, ध्यान करो, यू नो, शक्ति ड्रॉप लो, अपना सुदर्शन क्रिया लो, आयुर्वेद पर भरोसा करो, इंडियन नॉलेज सिस्टम को समझो, तो फिर हम कौन होते हैं भाई, हम क्यों नहीं बता दें? मुझे बहुत दिन ये झिझक रहा, लेकिन अब झिझक नहीं है, इसके बारे में ऊंची आवाज में बोलना पड़ेगा शब्दों की मर्यादा रखते हुए। है ना? जागरूकता से बदल जाएंगी चीजें।
Ahana: हां, भैया वॉटर हार्वेस्टिंग की कुछ तकनीक हमें शेयर करेंगे आप जो हम सबको अडॉप्ट करनी चाहिए?
Binay: हां, देखो हमारे पूर्वजों से ना बहुत कुछ सीखने को है। जो सौभाग्यशाली हैं जिनके दादाजी अभी भी जीवित हैं, कई जगह पर देखेंगे परदादा भी जीवित हैं, तो उनके पास बैठेंगे ना तो जीवन जीने के सारे तरीके आपको दिखेंगे, क्योंकि जब ये हैंडपंप, बोरवेल और जो भी इंडस्ट्री-बेस्ड वॉटर अवेलेबिलिटी बनाई गई, पाइप, प्लंबिंग, नल, जल, ये वो, इससे पहले प्रकृति पर आधारित ही जल का ये था, वॉटर हार्वेस्टिंग कोई नई चीज नहीं है, जल संरक्षण से ही जिए। इसीलिए जो गांव को बसाया, नदियों किनारे बसाया, और जहां नदियां कम थीं या जो भी, जब पापुलेशन बढ़ा तो कुएं खोदने शुरू किए, है ना? फिर तालाब बनाए, ये सब, जैसे बेंगलोर को कहते हैं दुनिया का एकमात्र शहर है जो नदी के किनारे नहीं है। 700 तालाब पहले बनाए, तब जब जेसीबी और एक्सकेवेटर्स नहीं थे तब, और तालाब बना के फिर बसाया। तो वॉटर हार्वेस्टिंग कोई बड़ी चीज नहीं है, देखो पानी जो बह के निकल जा रहा है ना, उसको रोक लेंगे धरती में रोक लेंगे, तो वही है वॉटर हार्वेस्टिंग। जल का संचय सबसे ज्यादा धरती के अंदर होगा, भूगर्भ जल पर ही हमारा भरोसा ज्यादा है। तो धरती पानी को धरती के अंदर जाने दीजिए, माने क्या, धरती पिएगी पानी को। आप कैसे पीते हैं पानी को? आप वहां बैठे हैं दर्शकों में, और मैं यहां से होस पाइप लेके ऐसे करूं मुंह खो- मुंह खोलो और पानी दे दूं, आप पी पाओगे क्या? नहीं पी पाओगे, क्यों, उसमें स्पीड ज्यादा है। आप पीने के लिए एक पहले तो एक आसन में बैठते हो, आपकी दादी अगर मां सब जीवित हैं, तो जैसे खड़े-खड़े पानी पियोगे डांटेंगी वो, "अरे, बैठ के पीना, पानी पियो बैठ के, दूध पियो खड़े हो के," बहुत सुना है हमने बचपन में। तो आप बैठते हो पहले, फिर एक बार में एक गिलास लेते हो, घूंट-घूंट करके पीते हो तो वो पानी ऊर्जा का संचार करता है, पाचन बनाता है, खून बनता है। धरती को पानी पिलाना हो तो जल की गति को रोकना पड़ेगा। जैसे गति रुकेगी, मतलब गति कम होगी तो पानी फैल जाएगा, और जैसे फैलेगा ना तो धरती में सोख लेगा, धरती उसको सोख लेगी। वॉटर हार्वेस्टिंग इतना ही है, स्लो इट, स्प्रेड इट, सिंक इट। धीमा करिए, फैलने दीजिए, सिंक इट तो खुद ही हो जाएगा। क्योंकि जब आप 100-150 के स्पीड में गाड़ी चला रहे हो, तो यू कांट अफोर्ड टू लुक लेफ्ट एंड राइट, यू आर जस्ट लाइक लेजर बीम, सामने देख के चलोगे। कोई स्पीड ब्रेकर आता है ना तो गाड़ी की स्पीड रुकती है, तब आप दाएं-बाएं देखते हो, ओके, बेंगलोर 100 किलोमीटर। पानी वैसा ही है, ज्यादा गति में रहेगा तो जो सामने आएगा उड़ा के ले जाएगा, उसी को कहते हैं इरोजन, भूस्खलन हो जाता है। गति को रोकिए, तो अभी इतना समझ लीजिए, नहीं कुछ हो आप शहर में रहते हैं, एक ड्रम लगा दीजिए ना जहां पाइप लगा है छत का पानी आप ऐसे ही जाने दे रहे हैं, उसको एक टंकी में जमा कर लीजिए, खत्म बात। वॉटर फिल्टर्स आजकल मिलते हैं, अंडरग्राउंड टैंक बनाइए, करोड़ नहीं खर्चा होता उसमें। हमारे एक हैं अपने मित्र, इसी रोड पर हैं, वेंकटराव सर, हम सारे ट्रेनिंग में उनका घर दिखाते हैं, 70-80 हजार लीटर पानी वो ये करते हैं, तीन लोग होते हैं घर में, बोले 7 से 8 महीना हमारा चल जाता है इसी से ही, ही इज नॉट डिपेंडेंट ऑन म्युनिसिपैलिटी का वॉटर। डेढ़-दो लाख में या जो भी उन्होंने टंकी-वंकी खोदा उतने में हो गया, तो वॉटर हार्वेस्टिंग जुगाड़ है, जुगाड़ घर में मिलता है, बाजार में नहीं मिलता, जहां से भी जैसे भी पानी को सुरक्षित कर सकते हैं कर लीजिए, वॉटर हार्वेस्टिंग वही है। नहीं हो, देयर इज समथिंग गवर्नमेंट एजेंसी है सेंट्रल ग्राउंड वॉटर एजेंसी, सीजीए, हां, सीजीडब्ल्यूए कुछ करके, उनको फोन करिए, वो आ के आपके अपार्टमेंट्स में आ के कैसे बोरवेल रिचार्ज करना है, क्या करना है, वॉटर हार्वेस्टिंग कैसे करनी है एक्जिस्टिंग अपार्टमेंट्स में, वो बता देंगे, सिंपल।
Ahana: भैया, जैसे कि आश्रम विजिट करना हो या इतना खूबसूरत यहां का आर्ट ऑफ लिविंग परमाकल्चर का वेदर है और तरह-तरह की सब्जियां हैं, इतनी सुंदर, उनकी महक अलग है, और जो खाना भी मैंने खाया बहुत टेस्टी है, बाकी खाने से जो हम खाते हैं, यहां की जो सब्जियां हैं और उसका खाना है वो अलग है, तो लोग कैसे यहां आ करके विजिट कर सकते हैं?
Binay: हां-हां, आश्रम तो देखो पब्लिक प्लेस ही है, सुबह 8:00 बजे से संध्या यू नो 6:00 बजे तक यहां सारे गेस्ट के लिए, आगंतुकों के लिए हमारा आश्रम खुला है। आते हैं तो हम हमारी व्यवस्था है, वहां पर हमारा गेस्ट रजिस्ट्रेशन आपको हमारी बस में बिठाएगा, निशुल्क पूरे आश्रम घुमाएगा, उसमें यहां भी दिखाते हैं, गौशाला दिखाते हैं, गुरुकुल सब दिखाते हैं। आप चाहें तो चल के भी आ सकते हैं, अपॉइंटमेंट ले लीजिए हमारी वेबसाइट पर जा के, फॉर्म होगा, नंबर्स होंगे, फोन करिए, अपॉइंटमेंट लीजिए। आपको अगर परमाकल्चर फार्म विजिट करना है तो आपको अपॉइंटमेंट लेना पड़ेगा, है ना? क्योंकि हमारा समय ज्यादा खेतों में बीतता है, अगर हम गेस्ट को अटेंड करने में ज्यादा समय लगा दिए और वो भी रैंडम आते रहे, तो हमारा खेत अच्छा नहीं रहेगा, फिर आप विजिट करके क्या देखोगे, है ना? तो आप अपॉइंटमेंट लेके कर सकते हैं, नंबर्स वगैरह उपलब्ध हैं, वेबसाइट की लिंक मिल जाएगी तो हो जाएगा।
Ahana: बस सेकंड लास्ट क्वेश्चन है मेरा, इसके बेनिफिट हमें लिस्ट कर दीजिए कुछ परमाकल्चर के?
Binay: परमाकल्चर के बेनिफिट्स, हां, सही है। देखो जब तक हम ये इंटेलेक्चुअली हर चीज को समझा के नहीं देंगे ना, तो ये अगली पीढ़ी को समझ में नहीं आता, दे आर सो मच ऑफ ब्रेन ओरिएंटेड, दे आर वेरी लेजर शार्प, वो वो काफी उनको उनके ऐसे लॉजिकल प्रश्न होते हैं। देखो फायदे की बात है तो परमाकल्चर खाली भोजन उगा के नहीं देगा, जैसा मैंने शुरुआत में कहा, आपके डेली रहन-सहन में जो केमिकल कंजंप्शन है, वो कम होगा, उससे क्या फायदा होगा? स्किन डिजीजेज कम होंगे, शरीर स्वस्थ रहेगा, आपका परिसर स्वस्थ रहेगा, आपके जहां रहते हो वहां के हवा में माइक्रो पार्टिकल्स नहीं होंगे प्लास्टिक और अलग-अलग केमिकल्स वाले, ओके? आपका खर्चा बहुत बचेगा भाई, आप सोचो कि जब आप ऑफिस के लिए आपके पिताजी निकल रहे हैं, मैं छोटे बच्चे से बात कर रहा हूं, आपके घर के बाहर कितने जोड़ी जूते रखे हैं, उतने लोग रहते हैं क्या घर में? और वो जूते कहां जाएंगे 2-4 साल बाद? अब तो सारे जूते प्लास्टिक के आ गए, रबर के नहीं हैं प्लास्टिक के हैं, और उसका देखो ध्यान से सोल उसका इतना मोटा होगा और ऊपर का जो फीता होगा इतना पतला होगा, माने टूटेगा जल्दी, और टूटा तो रिपेयर नहीं है, जाता है डंपयार्ड में जाता है, प्लास्टिक विल टेक 1000 मोर देन 1000 इयर्स टू डी-ग्रेड, नॉट डी-कंपोज, एंड आफ्टर डी-ग्रेडेशन व्हेयर डज़ इट गो? इट गोज़ टू द फर्टाइल लैंड ऑर गोज़ टू द ओशियन। तो आप अगर परमाकल्चर को समझ लोगे ढंग से, आपका जूता समुंदर में नहीं जाएगा, उतना नहीं जाएगा, आप तभी खरीदोगे नया जब आवश्यकता पड़ती है, आप नीड-बेस्ड परचेस करोगे पहली चीज, दूसरा आपकी ग्रीन एक्टिविटी बढ़ेगी बाबू। लेटेस्ट साइंटिफिक रिसर्च पेपर पब्लिश हुआ है कि ये 20 मिनट का ग्रीन एक्टिविटी, बच्चे अगर मिट्टी में हाथ डालें, पौधों के साथ रहें, तो उनका आईक्यू बढ़ता है 25%। ट्रू, भैया। और अगर मान लो 25% बढ़ गया आपको नहीं समझ में आ रहा, आप सोचो अगर किसी का बच्चा भगवान ना करे, उसका आईक्यू 25% कम है, वो एब्नॉर्मल है, जी पाएगा क्या, दुनिया जीने देगी उसको? यहां तो 80-90% वाले पैरेंट प्रेशर की वजह से सुसाइड कर लेते हैं, 98-99 से कम वाले को लगता है हम जीवित क्यों हैं? वैसे में किसी का आईक्यू अगर 25% कम हो तो मतलब व्हाट ए बर्डन, हिज लाइफ इटसेल्फ विल बिकम बर्डन! 20 मिनट्स ए डे डीलिंग विथ द मड एंड प्लांट्स, इट इंक्रीजेस योर आईक्यू बाय 25%, टेल मी इजंट इट ए बेटर डील? यू मेक योर लाइफ डिपेंडेंट ऑन सॉयल एंड प्लांट, एंड यू विल फाइंड दैट योर लाइफ इज लेस एंड लेस डिपेंडेंट ऑन द मेडिसिन एंड द मार्केट एंड द हॉस्पिटल एंड द डॉक्टर्स। व्हॉट मोर बेनिफिट आर यू लुकिंग फॉर? एंड देन कम्स योर डाइजेशन विल बी गुड, 80% ऑफ़ द पापुलेशन इन द ग्लोब इज सफरिंग विथ कॉन्स्टिपेशन, नो वन टॉक्स अबाउट इट। पाचन नहीं ठीक है क्योंकि भोजन ही ठीक नहीं, कहीं भी कुछ भी कैसे भी क्या भी खा लेते हैं। शुद्ध उगाओगे तो खाओगे, और आपको ये भी पता चलना चाहिए कि जब भोजन शुद्ध और लोकल होता है ना, तो आपका क्वांटिटी का डिमांड उतना नहीं होता। बॉडी इज लुकिंग फॉर न्यूट्रिशन, योर टंग इज लुकिंग फॉर टेस्ट, माइंड इज लुकिंग फॉर कि पेट भर के खाना, शरीर को पौष्टिकता चाहिए, तो कम भोजन में आप फील महसूस भरा हुआ महसूस करोगे। ओके? ये एक फायदा होगा, शुद्ध उगेगा, और जब शुद्ध उगेगा तो उसमें कितने लोग इन्वॉल्व होंगे? मैनुअल जितना होगा एग्रीकल्चर, क्वांटि- क्वालिटी उतनी ज्यादा बढ़ेगी। आत्मीयता बढ़ेगी, आप देखो किसी से मिलते हो वन टू वन, वो एक अलग कनेक्शन होता है, ज़ूम कॉल में रोज मिलते हो वो एक अलग कनेक्शन होता है। रोज वीडियो कॉल में मम्मी-पापा से बात हो जाती है ना, फिर भी क्यों ऐसा लगता है घर जाना चाहिए एक बार? ऑनलाइन हैज़ ए लिमिटेशन, बट ये कनेक्शन ये दिल की बात है, एग्रीकल्चर इज एन आर्ट, एव्री आर्ट कम्स फ्रॉम द हार्ट, साइंस कम्स फ्रॉम द ब्रेन, बोथ आर नीडेड। बट दिस, लेट इट रिमेन एन आर्ट। परमाकल्चर को, एग्रीकल्चर को आर्ट रहने दो, ये कलुषित नहीं होगा, बिगड़ेगा नहीं। इसको सही करके रखो क्वालिटी वाइज, बाकी सब चीजें सध जाएंगी, आई टेल यू, एंड एट द एंड ऑफ़ इट, यू विल बी ए वाइब्रेंट पर्सन, फिजिकली स्ट्रांग, मेंटली काम, एंड क्लैरिटी इन द माइंड, क्या बोलते हैं गुरुदेव कहते हैं ना, क्लैरिटी इन माइंड, प्यूरिटी इन हार्ट, एंड सिंसैरिटी इन एक्शन, ये तीनों चीजें सधनी हैं तो ये भोजन उगाने की चीजों से हो जाएगा। गाय का संगत मिलेगा, जिनको गौ माता ललिता सहस्रनाम में कहा, तो अनलिमिटेड, आई कैन गो ऑन टॉकिंग अबाउट द बेनिफिट्स दैट यू विल गेट, बट टेल मी, सारा चीज बेनिफिट मिलेगा तभी करोगे, या पहले बेनिफिट या पहले एक्शन, वो बताओ? करो ना, मिलेगा, समय-सत्यापित चीजों पर प्रश्न नहीं करना चाहिए। विज्ञान-सत्यापित चीजों पर, विज्ञान खुद प्रश्न कर रहा है, थोड़ी देर पहले कुछ और बोलता था, "डाल्डा बढ़िया," बाद में बोला, "वनस्पति ये बढ़िया," बाद में बोला, "रिफाइंड बढ़िया," अब बोलता है, "यू नो, यू शुड हैव प्यूरीफाइड बटर, ए2 मिल्क एंड ऑल दैट।" तो विज्ञान-सत्यापित ये है, लेकिन समय-सत्यापित है कि कृष्ण गाय पाले तो नाम गोपाल हो गया। और जब वो जिस एज में थे, उस एज में उनको नाम पड़ा माखनचोर, उनको दूध और दही चोर नहीं बोला। भले मानस, तुम्हारे लिए भी इंडिकेशन है कि बच्चे जब शरीर में बड़े हो रहे हैं, एडोलिसेंट एज बोलते हैं, जब शरीर में वीर्य बनना शुरू हुआ, मक्खन खिलाओ उनको, संतति आगे की मजबूत बनेगी। हमारे देश को सुरक्षित रहने के लिए, हमारे बच्चों के शरीर में दम होना बड़ा आवश्यक है, और दम ये कुरकुरे और मैगी खाने से नहीं आता, वो शुद्ध भोजन से आता है। बेनिफिट्स आर अनलिमिटेड, प्रोवाइडेड यू आर रेडी टू टेक इट अप, डाइव डीपर इनटू इट, एंड देन रीप द बेनिफिट्स।
Ahana: यस भैया, थैंक यू। और एक लास्ट क्वेश्चन है कि गौशाला हमें निर्माण करनी चाहिए जो इंडिया में शुरू से ही एक कल्चर रहा है, तो वो हमें कैसे करनी चाहिए और परमाकल्चर में हम जब एंटर करेंगे तो उसका क्या योगदान रहेगा, एक दूसरे से कैसे कनेक्ट हैं?
Binay: हां, गौशाला जो है ना, बड़ा ही नया शब्द है, वेद में नहीं मिलता। ओके? क्योंकि जैसे आजकल के जो मॉल्स हैं ना जहां खाने की चीजें मिलती हैं, कच्चा अनाज से लेके कटे हुए सब्जियों तक, टू रेडीमेड मसाले तक, ये सब थोड़े साल पहले नहीं थे, क्यों नहीं थे, क्योंकि सब कुछ घर में हो जाता था। गौशाला नहीं था पहले क्यों, क्योंकि हर घर में गाय पाली जाती थी, अब घर में गाय नहीं पाली जाती, कुत्ते पाले जाते हैं। ओके? और जर्सी पाला जाता है, देसी पाला जाता है, गाय माने देसी हां, जो देसी नहीं है वो गाय नहीं है, वो कुछ और हो सकता है या हो सकती है। तो हमने जब पालना बंद कर दिया तो उनकी प्रजाति कम होने लगी, है ना? जब प्रजाति कम होने लगी तो अब उनका जब कम हुआ ना तो एक एक शेर है, उसका फर्स्ट लाइन मुझे याद नहीं, सेकंड लाइन में कहते हैं, "वो मर गया तो उसके हुनर का पता चला।" ओनली व्हेन यू लूज समथिंग यू रियलाइज कि अरे बाप रे, हाउ इंपॉर्टेंट इट वाज इट वाज! जैसे घर में कई बार कई बार क्या, शहरों में तो इतनी परंपरा सी आ गई ना, रिटायर हुए, बूढ़े हुए तो ओल्ड एज होम में डाल देते हैं, आपको नहीं विश्वास है तो ओल्ड एज होम जा के देखिए, कहां आपको कोई भीखमंगे का बाल बाप नहीं पड़ा है वहां पर, सब्जी बेचने वाला नहीं अपने बाप को पहुंचाता, अमीर लोग पहुंचाते हैं। तो गौशाला क्या है, अब रखना पड़ा, गायों को रखना पड़ा, नहीं तो बची-खुची भी खत्म हो जाएगी। और वो खत्म हो जाएगी तो उसका जो डायरेक्ट इफेक्ट पड़ेगा, वो अंडरग्राउंड वॉटर अवेलेबिलिटी अवे- अवेलेबिलिटी पर होगा। भूगर्भ जल की जो उपस्थिति है ना उस पर हिट होगा, हो रहा है जब गायों की उपस्थिति कम हो जाएगी तब। ये बात शुरुआत में मैं बोलता था तो मुझे भी कई बार लगता था कि मैं इस चीज को प्रूफ कैसे करूं? तो आपको मैं दो उदाहरण देता हूं, आप सब कुछ जा के सर्च कर सकते हैं। देयर इज ए पर्सन ऑन अ ऑन ये, जिम्बाब्वे में, हिज नेम इज एलन सेवरी। वो दुनिया के सबसे बड़े इकोलॉजिकल साइंटिस्ट माने जाते हैं, उनका टेड में टॉक है, टेडएक्स में तो हमारे जैसे लोग भी चले जाते हैं, टेड में तब आप जाते हैं जब आपने दुनिया के भले के लिए कोई जबरदस्त यूनिक चीज करी जो किसी ने नहीं किया, उसमें उनके दो टॉक हैं। वो सुनिएगा, आंख में आंसू नहीं आ जाएगा तो बताना, और वो आदमी भाई वैज्ञानिक है और वो अभी रेगिस्तान को हरा-भरा करने के प्रोजेक्ट लेते हैं, 90 साल के हो गए। उन्होंने मैं छोटे में बता देता हूं ताकि आपको गायों के इंपॉर्टेंस के बारे में पता चले, जानवर पर आधारित खेती पर आपका भरोसा। तो उन्होंने उन अ उ- साउथ अफ्रीकन गवर्नमेंट को लगा कि हमारा एमेजॉन फॉरेस्ट जो है ना वो संकुचित होता जा रहा है, कम पड़ छोटा होता जा रहा है, विनाश हो रहा है, इसके पीछे क्या कारण है? इनको लगा दिया कि भाई आप बताओ आप हमारे साइंटिस्ट हो, यू टेल मी, तो इन्होंने कुछ साल के रिसर्च के बाद बोला कि देखो हाथियों की संख्या बढ़ गई है, वो बहुत अनाज ये क्या गाछ पेड़-पौधे सब खराब कर रहे हैं, इनको मारना पड़ेगा, इनकी संख्या कम करनी पड़ेगी तो हमारे ये बचेंगे, सरकार बोली, "ठीक है, कंसलटेंट हो आप गवर्नमेंट के और वो हो तो मारो।" आदेश दिया और 22,000 हाथी मारे गए इन कुछ सालों में, जैसे-जैसे हाथियों के मरने की संख्या बढ़ती गई जंगल का डिस्ट्रक्शन और भी बढ़ता गया। जंगल मरने लगे और ज्यादा, तो इनको रियलाइज हुआ, "अरे यार, ये तो मैं तो कुछ और सोचा था, ये नहीं हो रहा क्यों?" तो फिर जा के उन्होंने बोला, "नहीं-नहीं-नहीं-नहीं, रोको-रोको-रोको-रोको।" उसके बाद अध्ययन करना शुरू किया, तो वो अपना टॉक शुरू करते हैं कि, "आई विल डाई विथ दिस ग्रीफ दैट आई बिकॉज़ ऑफ मी 22,000 और मोर देन 20,000 एलीफेंट्स गॉट किल्ड, एंड नाउ आई रियलाइज़ कि जब वो उनका जो एक्सक्रीटा आता है, किसी भी नेटिव जानवर का जब गोबर गिरता है ना धरती पर नेटिव वाले का, तो 1 किलो गोबर में शायद 17 लीटर वर्षा के जल के संचय की शक्ति होती है।" 1 किलो गोबर में, तो खेत में जब गोबर होगा, हर जगह जब गाय चरेंगी, वो सब कुछ होगा, तो क्या होगा? जितना ज्यादा गोबर होगा, वो उतना ज्यादा पानी होल्ड करेगा। ये आपको मेरी बातों को ब्रह्मवाक्य नहीं मानना है कि मैं बोल रहा हूं तो सही है, ऐसा कुछ भी नहीं, आप क्रॉस चेक कर लीजिए। ओके? दूसरा, महाराष्ट्र में एक जिला है गोंदिया डिस्ट्रिक्ट है, आप जाइए वहां पर, भारत में शायद पर कैपिटा सबसे ज्यादा गाय उस जिले में हैं देसी वाली, और वहां के लोगों से मैं मिला हूं, गोंदिया शायद विदर्भ में आता है, मैं उतना जानकारी नहीं रखता, लेकिन मुझे लग रहा है वो बॉर्डर में ही है, विदर्भ सूखा हुआ जगह है। गोंदिया में पानी की कमी नहीं है, वहां के लोगों से मिला, बोले कि हम गाय को बेचते नहीं हैं, गाय हमारे खूंटे पे मर जाए, हम बेचते नहीं हैं, आदान-प्रदान जरूर कर लेते हैं, हमारे जिले से बाहर नहीं जाता, हमारे गांव से बाहर नहीं जाता, इतनी गाय हैं वहां पर, माने गोबर है वहां पर। अभी अपार्टमेंट इतने बनाते हो तो अपार्टमेंट के साथ इतने टॉयलेट्स भी तो हैं आपके, हर 5-10 मीटर पर एक टॉयलेट है, तो टॉयलेट का ही भंडार लगा दे, जहां गाय हो गोबर का भंडार होगा ना? तो जितना ज्यादा गोबर है उतना ज्यादा जल संचय हो रहा है। तो परमाकल्चर कभी भी मेरे हिसाब से, मैं जिस तरह से परमाकल्चर को देख रहा हूं, हमारी पुरानी पद्धति को ही नया नाम दिया गया है, और बिना जानवरों के सहारे नहीं कर पाएंगे, जानवरों का सहारा हटेगा तो ट्रैक्टर का सहारा बढ़ेगा, चूज़ इट वाइज़ली। है ना? और गौशाला बनाना चाहिए, रखना चाहिए, जब गुरुदेव जो काम कर रहे हैं वो हमको भी करना चाहिए बिना इफ और बट के, सीधी सी बात है, संत कर रहे हैं तो अच्छा ही होगा। बिल्कुल। है ना? तो हमें भी करना चाहिए, इन्होंने 2000 गाय रखी हैं और भी बाकी हमारे 15-20 आश्रम में गौशालाएं हैं छोटी-बड़ी, आप एक ही पाल सकते हैं पाल लीजिए, पांच रख सकते हैं रख लीजिए, फायदा ही होगा। "घृतं वर्धते बुद्धिः, क्षीरम् आयु वर्धते" कहते हैं, घी खाने से बुद्धि का विकास होता है, दूध पीने से शरीर की आयु बढ़ती है, शक्ति बढ़ती है, "गोमये वसते लक्ष्मी" बोलते हैं, भारद्वाज ऋषि ने लिख दी आए सब गोसूक्तम में। तो वो जब पढ़ेंगे और समझ लेंगे, तो गाय पर से प्रश्न उठेगा, फिर वहां पर लाभ और हानि की बातें नहीं रहेंगी, ये एक आदर्शवादी बातें हैं, प्रैक्टिकल में जब आपके साथ पास खेत होगा और गाय होगा तो दोनों सबल होंगे, और गाय है और खेत नहीं है या खेत है और गाय नहीं है, तो दोनों में आप निष्फल होंगे, स्ट्रगल करेंगे आप। अगेन, दैट्स हाउ यू शुड बी योर फार्म, ऐसे ही होना चाहिए।
Ahana: सो, इट्स अ मेरे पास शब्द नहीं हैं भैया।
Binay: हां, देखो ये मेरे लिए बड़ा ही ना अ दिल के करीब है ये चीज, क्योंकि मैंने जीवन में वो वो पक्ष भी देखा है जहां पर दुनिया दौड़ रही है। मैंने कॉर्पोरेट तब छोड़ा था जब 2012 में छोड़ा है मैंने, फरवरी में, 13 अप्रैल 2012 को मैं आश्रम आ गया था। तो तब सॉफ्टवेयर पीक में जा रहा था, एकदम जो आजकल बातें करते हो तब से शुरू हुआ था, मैंने तब छोड़ा, वो दुनिया देखी मैंने, और अभी ये भी देख रहा हूं, और तब मैंने देखा था कि हमारे कलीग्स जेब में क्रोसिन लेके घूमते थे, और लोग नाइट शिफ्ट में लोग पूछने आएंगे, "बाय द- बाय एनी चांस डू यू हैव अ क्रोसिन?" मैं बोला, "क्यों रखूं मैं? व्हॉट हैप्पेंड?" "आई एम नॉट फीलिंग वेल।" अरे, तो तुमको अच्छा नहीं लग रहा है तो उसके लिए क्रोसिन क्या करेगा? वहां शौक था, और तब वो एक फैशन बना था कि, "यू नो, आई एम सो कमिटेड टू माय वर्क दैट आई कैरी माय मेडिसिन।" मरने के लिए काम करने आए थे क्या? या अच्छे से जी पाऊं उसके लिए नौकरी करे थे? तब नहीं समझ में आया, अब समझ में आता है, 30-40 की उम्र होते-होते ऐसे नींबू की तरह निचोड़ लिए जाते हैं। इन इन इन द स्प्री ऑफ़ मैचिंग अ डिफरेंट टाइम ज़ोन्स, वर्किंग फॉर अ क्लाइंट हुम यू हैव नेवर मेट, हुम यू विल नेवर मीट। पता नहीं क्या कर रहे हो! नौकर बने हुए हो, कमा कोई और रहा है, आपको लगता है करियर सेट हो गया। इस तरफ आओ ना! वहां भी कोई प्रोडक्ट बेचने में ही मदद कर रहे हो, जो करियर जिसको कहते हो, कुछ बिक रहा है, कोई क्रेडिट कार्ड बेच रहा है, कुछ मोजे बेच रहा है, कुछ भी बेच रहा है, हार्ड से लेके सॉफ्ट तक। भोजन में आओ ना! यहां यहां भी बेचने वाले कम पड़ रहे हैं, खरीदने वाले ज्यादा हो रहे हैं, मजे की बात ये है। इफ यू आर द अर्ली बर्ड, आई टेल यू, यू विल बी द रूलर। एंड इफ यू अंडरस्टैंड दीज़ एस्पेक्ट्स, यू विल बी ग्राउंडेड, एंड दैट्स वेयर यू विल गेट ब्लेसिंग। 'चिरंजीवी भव:' का आशीर्वाद वहां से आएगा, नहीं तो टेक्निकली-टेक्निकली तो हम बोलके निकल लेते हैं, "हां, खुश रहो, ठीक है।" 'चिरंजीवी', वो क्यों, तुम्हारे जैसे लोग चिरंजीवी होंगे तो धरती का भला होगा। गुरुदेव इज लुकिंग फॉर दैट काइंड ऑफ़ पीपल, एंड ही इज मेकिंग दैट काइंड ऑफ़ पीपल। है ना? शी इज वन सच एग्जांपल, एंड देयर आर मिलियंस। हरि के हजार हाथ, आप भी आ जाओ ना एक हाथ बनके। मजा आ जाएगा!
Ahana: थैंक यू सो मच एव्रीवन, सबने बहुत एंजॉय करके सुना है, और जो हमें आज सीखने को मिला है, काफी ज्यादा सिंसैरिटी आ गई है। और आप सबको इनवाइट करना चाहेंगे 22-23 अगस्त में जो कॉन्फ्रेंस हो रहा है गुरुदेव के साथ है और स्पीकर्स जो आ रहे हैं। यहां पर अभी इतनी देर में सुनने में समझ तो आ ही रहा है कि लैकिंग ऑफ अ हमारा जो एजुकेशन सिस्टम था, उसकी वजह से दूसरों ने राज कर लिया हम पर, लेकिन कहीं ना कहीं अब हमको अवेयर होकर के और जो परमाकल्चर है वो अपना करके ये बताना पड़ेगा कि हम अपने फार्मर्स के साथ हैं, और जो फार्मिंग कर रहे हैं हम अह नेचुरल फ़ूड और परमाकल्चर फ़ूड को सपोर्ट करेंगे, तो फिर अ और हिम्मत बढ़ेगी और जो आने वाली जनरेशन है इस पर कदम रखने वाली है, उनको और हिम्मत मिलेगी। तो हम सबको अवेयर होकर के ये नहीं है कि हम हमारी फ़ील्ड नहीं है तो हमें ये आना नहीं है, ये करना नहीं है, तो सभी को इनवाइट करते हैं, आप सब आइए और इस कॉन्फ्रेंस को अटेंड करके अपनी अवेयरनेस को बढ़ाइए और सपोर्ट करिए हमारे देश के फार्मर्स का। भैया, मुझे बहुत अच्छा लगा आपसे मिलकर के, थैंक यू सो मच। आपने वापस से मुझे एक बार नेचर से कनेक्ट कर दिया, और इस जो मेरी एंटरप्रेन्योर यात्रा जर्नी के दौरान मैंने महसूस किया था कि जब हम अपने नेचर से कनेक्ट होते हैं तो हम एक जिम्मेदारी निभा पाते हैं। इतने एम्प्लॉईज़ को सर्व करना, उनका ख्याल रखना, क्लाइंट्स का, तो वो एक जिम्मेदारी जो मुझे सी- मैंने सीखी, वो अपने आप से कनेक्ट हो के, और नेचर से कनेक्ट हो करके एक और जिम्मेदारी लगने लगी है। सो, थैंक यू सो मच, बहुत अच्छा लगा आपसे मिलके।
Binay: थैंक यू, जय गुरुदेव एव्रीवन।
Ahana: जय गुरुदेव।